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हल्द्वानी में Google और Meta Ads कोर्स — असली बजट पर परफ़ॉर्मेंस मार्केटिंग, एक साल फुल-टाइम

Monal Academy · अपडेट Invalid Date

हल्द्वानी में मोनाल डिजिटल का स्टूडियो फ़्लोर — जहाँ यह प्रोग्राम पढ़ाया जाता है

परफ़ॉर्मेंस मार्केटिंग विज्ञापन की सबसे नापी जा सकने वाली नौकरी है: हर रुपया अंदर, हर नतीजा बाहर। मोनाल एकेडमी का Google & Meta Ads प्रोग्राम हल्द्वानी में एक साल का फुल-टाइम कोर्स है — दोनों ऐड प्लेटफ़ॉर्म शुरू से अंत तक, लैंडिंग पेज और कन्वर्ज़न, और वह मेज़रमेंट स्टैक जो साबित करे कि क्या काम किया। आख़िरी टर्म में आप असली क्लाइंट्स के लिए, असली बजट पर, लाइव कैंपेन प्लान, लॉन्च और ऑप्टिमाइज़ करते हैं, और एजेंसी की तरह हर हफ़्ते रिपोर्ट देते हैं।

एक नज़र में

अवधि12 महीने, फुल-टाइम, कैंपस में
जगहमोनाल एकेडमी, करन टावर, गैस गोदाम रोड, हल्द्वानी 263139
योग्यता12वीं पास (कोई भी स्ट्रीम), ग्रेजुएट, या नौकरी बदलने वाले। पोर्टफोलियो ज़रूरी नहीं
टूल्सGoogle Ads, Meta Ads Manager, Google Analytics 4, Google Tag Manager
कोर्स के अंत मेंअसली ख़र्च और असली नतीजों वाली कैंपेन केस स्टडी, और उनकी रिपोर्टिंग
फीस
अगला बैच

यह कोर्स किसके लिए है

  • आपको आँकड़े पसंद हैं और सही होना पसंद है। परफ़ॉर्मेंस मार्केटिंग हर सुबह बताती है कि आप थे या नहीं।
  • आप कॉमर्स, B.Com, BBA या MBA के स्टूडेंट या ग्रेजुएट हैं और ऐसी मार्केटिंग नौकरी चाहते हैं जो सेल्स न हो।
  • आप ऐसी रिमोट-फ़्रेंडली स्किल चाहते हैं जिसके लिए एजेंसियाँ, ई-कॉमर्स ब्रांड और स्टार्टअप सब हायर कर रहे हों।
  • माता-पिता के लिए: यह सबसे साफ़ करियर सीढ़ी वाला ट्रैक है — जूनियर से स्पेशलिस्ट से मैनेजर — और सबसे नापने लायक नतीजों वाला।

क्या सीखेंगे

  1. 01मार्केटिंग की बुनियाद — फ़नल, ऑडियंस, ऑफ़र और पोज़िशनिंग: वह सोच जो किसी भी प्लेटफ़ॉर्म को काम करवाती है।
  2. 02Google Ads — Search, Display, Performance Max और YouTube कैंपेन: स्ट्रक्चर, बिडिंग और क्वालिटी स्कोर।
  3. 03Meta Ads — Facebook और Instagram कैंपेन: पिक्सल, कस्टम ऑडियंस, क्रिएटिव टेस्टिंग और स्केलिंग।
  4. 04लैंडिंग पेज और कन्वर्ज़न — ट्रैफ़िक को ऐसे पेज और फ़ॉर्म से नापे जा सकने वाले नतीजों में बदलना जो कन्वर्ट करें।
  5. 05मेज़रमेंट — GA4, Tag Manager, एट्रिब्यूशन और डैशबोर्ड: साबित करना कि क्या काम किया और जानना कि क्या नहीं।
  6. 06लाइव ब्रीफ़ टर्म — असली क्लाइंट्स के लिए लाइव कैंपेन प्लान, लॉन्च और ऑप्टिमाइज़ करना, एजेंसी की तरह हर हफ़्ते रिपोर्ट।

साल कैसे चलता है

महीना 1–3 — फ़ाउंडेशन। फ़नल, ऑडियंस, ऑफ़र। किसी प्लेटफ़ॉर्म से पहले ग्राहक की तरह सोचना सीखते हैं, क्योंकि गलत टारगेट किया कैंपेन पैसा बड़ी कुशलता से बर्बाद करता है।

महीना 4–9 — स्पेशलाइज़ेशन। Google Ads, फिर Meta Ads, फिर लैंडिंग पेज, फिर मेज़रमेंट। मेंटर की निगरानी में छोटे लाइव बजट पर हर हफ़्ते ब्रीफ़: सेटअप, लॉन्च, नतीजे पढ़ना, सुधारना। जो क्रिएटिव टेस्ट कर रहे हैं, उसे लिखना भी सीखते हैं।

महीना 10–12 — लाइव ब्रीफ़ टर्म। असली क्लाइंट, असली बजट, ऐसी साप्ताहिक रिपोर्ट जो क्लाइंट सच में पढ़ता है। जो केस स्टडी लेकर निकलेंगे, उनमें ख़र्च, नतीजे और आपके बदलाव दिखेंगे — एजेंसी का इंटरव्यूअर बस यही देखना चाहता है।

मेंटर जो खुद काम डिलीवर करते हैं

मेंटर आपके साल के दौरान स्टूडियो के अपने प्रोडक्ट्स और क्लाइंट्स का पेड मीडिया चलाते हैं।

कोर्स के बाद करियर

ग्रेजुएट इन रोल्स के लिए तैयार होते हैं: परफ़ॉर्मेंस मार्केटर, PPC स्पेशलिस्ट, मीडिया बायर, ग्रोथ एनालिस्ट। एजेंसियाँ, D2C ब्रांड, स्टार्टअप और स्थानीय कारोबार सब इन रोल्स के लिए हायर करते हैं, और कई छोटे क्लाइंट्स के लिए फ़्रीलांस करना आम है।

हम प्लेसमेंट का प्रतिशत नहीं छापते। विज़िट पर पुराने स्टूडेंट्स से मिलिए।

हल्द्वानी में पढ़ाई

करन टावर, गैस गोदाम रोड, हल्द्वानी के बीच में — काठगोदाम स्टेशन से लगभग 10 मिनट। काठगोदाम, लालकुआँ, भीमताल और रुद्रपुर से रोज़ आना-जाना; पहाड़ से आने वाले पास में PG लेते हैं। लिस्ट हमारे पास है।

एडमिशन कैसे होता है

  1. 01संपर्क करें — WhatsApp, कॉल या ईमेल।
  2. 02स्टूडियो देखें — ग्रोथ टीम से मिलें, एक लाइव कैंपेन डैशबोर्ड देखें। दूर से हैं तो वीडियो कॉल।
  3. 03सीट पक्की करें — अगले बैच में एनरोल करें।

कोई एंट्रेंस टेस्ट नहीं। कोई पोर्टफोलियो नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गणित चाहिए?

अंकगणित और स्प्रेडशीट पढ़ने की इच्छा। स्टैटिस्टिक्स की डिग्री नहीं; जो चंद फ़ॉर्मूले मायने रखते हैं, हम सिखाते हैं।

लाइव टर्म में किसका पैसा ख़र्च होता है?

असली क्लाइंट्स का बजट, हर लॉन्च पर मेंटर की मंज़ूरी के साथ। आप ऐड सैंडबॉक्स में नहीं सीखते; ऐसे पैसे पर सीखते हैं जो मायने रखता है, निगरानी में।

Google Ads या Meta Ads — कौन सा ज़्यादा काम का?

दोनों, और हर एम्प्लॉयर दोनों की उम्मीद करता है। Search माँग पकड़ता है; Meta माँग बनाता है। कोर्स दोनों को साथ सिखाता है और साथ नापना भी।

Google या Meta सर्टिफ़िकेशन मिलेगा?

कोर्स प्लेटफ़ॉर्म सर्टिफ़िकेशन परीक्षाओं की तैयारी कराता है और आप साल के दौरान उन्हें देते हैं। एम्प्लॉयर को केस स्टडी ज़्यादा प्यारी हैं — इसीलिए लाइव ब्रीफ़ टर्म है।

इसके बाद फ़्रीलांस कर सकते हैं?

हाँ। हल्द्वानी, रुद्रपुर और देहरादून के छोटे कारोबारों को ऐड चलाने वाला कोई चाहिए, और असली कैंपेन का पोर्टफोलियो ही उन्हें पाने का तरीक़ा है।

पार्ट-टाइम विकल्प?

नहीं। फुल-टाइम, कैंपस में।

पूरा प्रोग्राम, मॉड्यूल और टूल्स: Google & Meta Ads